पिछले
कुछ एक रोज़ fb पे
पढने को मिला क 90's का
दौर फिर से लौट आया है |
फिल्मों में
माधुरी, क्रिकेट
में जगमोहन, संजय
दत जेल में, नारायण
infosys में
इत्यादी इत्यादि...| साथ
ही वो गाना भी याद आया:
गुज़रा हुआ
ज़माना आता नहीं दोबारा....
और बस अब सभी
कुछ flashBack का
सा लगने लगा है |
जालंधर
के रंगपटल पर भी कुछ ऐसा ही
देखने को मिला:
नीरज
ने अपना वाही नाटक गिरगिट फिर
से किया | व्ही
रंग, व्ही
ढंग, व्ही
वो और व्ही हम |
राकेश
बेदी साहब ने ठीक वैसा ही नाटक
किया जैसा के 90 के
दशक में spice mobile वाले
करवाया करते थे | व्ही
double meaning comedy, व्ही
मोटी मोटी औरतें और उनके ठहाके,
व्ही pass
के लिए हो रही
मारा मारी, व्ही
pass की
black में
sale |
प्रो.
अंकुर ने व्ही
नाटक एक था गधा किया जिसे कभी
उसी देश भगत हाल में इतने ही
जोश के साथ किया गया था |
अब
और कहाँ तक चलेगी ये FlashBack
आईये देखते
हैं हम लोग..... |