बड़ों से सुना था - जवानी में अपनी सोच के दूध को सवालों की जाग लगाओ, तब सवालों के जवाब तलाशोगे तो लाखों लाख जवाब मिलेंगे और दहीं अच्छा जमेगा. फिर चिंतन कि लकड़ी से उसे मथो और देखना जो माखन निकलेगा वो तुम्हें श्रेष्ठ और बलवान बनाएगा. तब ये क्यू नहीं बताया के माखन कि पहचान कैसे होगी. अब तो लगता है जैसे माखन मथ मथ कर विष बन गया है. अब आगे विष को मथने से विष और विषैला होगा. जीवन और कटुतर होगा. लेकिन हाँ इस विष की भी तो अपनी एक पहचान होगी. सब को ना सही किसी को तो होगी किसी को तो ये विष विष ना हो कर औषधि लगता होगा. जीवनदायक विष. हा हा हा.... कितना सुखद लगता है सोचने मात्र से. कहां है वो.. कौन है वो.... कुछ दीख नहीं पड़ता... कोई है अरे कोई है .... कोई है यहाँ...??
क्षित विक्षित विष
बड़ों से सुना था - जवानी में अपनी सोच के दूध को सवालों की जाग लगाओ, तब सवालों के जवाब तलाशोगे तो लाखों लाख जवाब मिलेंगे और दहीं अच्छा जमेगा. फिर चिंतन कि लकड़ी से उसे मथो और देखना जो माखन निकलेगा वो तुम्हें श्रेष्ठ और बलवान बनाएगा. तब ये क्यू नहीं बताया के माखन कि पहचान कैसे होगी. अब तो लगता है जैसे माखन मथ मथ कर विष बन गया है. अब आगे विष को मथने से विष और विषैला होगा. जीवन और कटुतर होगा. लेकिन हाँ इस विष की भी तो अपनी एक पहचान होगी. सब को ना सही किसी को तो होगी किसी को तो ये विष विष ना हो कर औषधि लगता होगा. जीवनदायक विष. हा हा हा.... कितना सुखद लगता है सोचने मात्र से. कहां है वो.. कौन है वो.... कुछ दीख नहीं पड़ता... कोई है अरे कोई है .... कोई है यहाँ...??
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