सूत्रधार
:
नमस्कार
और
स्वागत
है
आपका
आज
की
मंचिय
प्रस्तुति
Mother
Imposible में
.
Mother Imposible का
कथावस्तु
जब
मेरे
अंतर
में
उभरा
उस
समय
मैं
इसके
लिए
एक
Short
फिल्म
की
परिकल्पना
कर
रहा
था
.
एक
Silent
Short Film. लेकिन
वो
जैसा
के
कहते
हैं
ना
के
मंच
के
प्रतिभ्गियों
की
नियति
मंच
ही
में
निहित
है
,
मुझे
भी शायद
इसी
लिए
इसकी
प्रस्तुति
के
लिए
मंच
ही
माध्यम
मिला,
और
मंच
भी
कौन
सा,
कोई
ऐसा
वैसा
मंच
नहीं
बल्कि
आधुनिक
रंगमंच
की
कमोबेश
सभी
सुख
सुविधाओं
से
सुसजित
ये
रंगमंच.
ऐसा
लगता
है
जैसे
अभी
कल
ही
की
बात
हो
1994,
2004, 2006 और
आज
2012.
आज
भी
वो
दिन
याद
करता
हूँ
तो
सिहर
उठता
हूँ.
वो
चंद
एक
रोज़
मेरे
लिए
गहरे
असमंजस
भरे
गुजरे
थे,
असमंजस
इस
बात
का
के
आखिर
इस
Silent
Short Film के
लिए
लिखी
गई
पटकथा
को
मंच
के
लिए
रूपांतरित
करूँ
तो
करूँ
कैसे.
सच
जानिएगा
साहिब
शब्दों
के
माध्यम
से
शुन्य
का
सृजन
करना
मेरे
लिए
कतई
आसान
काम
न
था.
बहुत
डर
लगा,
लगा
कि
इस
अभिशप्त
भूमि
पर
एक
कदम
भी
रखा
तो
फिर
बच
कर
नहीं
लौट
पाउँगा....लेकिन
वो
जैसा
की
कहते
है
न
की
एक
नशा
होता
है
थिएटर
करने
में.
अन्धकार
के
गरजते
हुए
महासागर
की
चुनोती
को
स्वीकार
करने
में,
पर्वताकार
लहरों
से
खाली
हाथ
जूझने
में,
अनमापी
गहराईयों
में
उतरते
जाने
में,
और
फिर
खुद
को
सारे
खतरों
में
डाल
कर
वहाँ
से
आस्था
के,
सत्य
के,
प्रकाश
के
कुछ
कणों
को
बटोर
कर,
समेट
कर
धरातल
तक
ले
आने
में.
-नशा
-
और
जिस
नशे
में
इतनी
गहरी
वेदना
और
इतना
तीखा
सुख
घुला
मिला
रहता
है
के
उसके
आस्वादन
के
लिए
मन
बेबस
हो
उठता
है
वो नशा -
बस
उसी
की
अनुभूति
के
लिए
मैं
एक
बार
फिर
यहाँ
पंजाब
से
कोलकत्ता
खिंचा
चला
आया,
जय
हो
नाट्य
कला
की
आधुनिक
रंग
परम्पराओं
की
के
जिनका
आश्रय
लेकर
मैं
इस
कहानी को रूपांतरित करने का
यह
साहस
या
आप
ये
कह
लीजिये
के
ये
दुसाहस
जुटा
पाया.
तो
आइये
मैं
आपको
अब
बिना
किसी
विलंभ
कहानी
या
पटकथा
के
अनुरूप
इसके
पात्र
और
परिस्थितियों
से
परिचित
करवा
दूँ...
यह
है
मेरी
कहानी
का
पात्र
John.
जी...
जी
नहीं,
मेरी
कहानी
का
पात्र
john
फिल्मो
में
अभिनय
नहीं
करता
अलबत्ता
उसकी
अपनी
एक
छोटी
सी
दुनिया
ज़ुरूर
है.
और
उसकी
इसी
दुनिया
का
हिस्सा
है
यह
चंद
एक
magazines.....
कितने
मासूम
बच्चे
है
ना.
ये
उसका
चश्मा,
उसका
mobile
phone, ये
बड़ा
सा
आइना,
कपडे,
बिस्तर,
कमरा
और
उसकी
माँ
की
ये
तस्वीर.
माँ
को
बचपन
में
ही
खो
दिया
था
John
ने.
पिता
को
दारु
और
बीडी
दोनों
पीने
की
आदत
थी
जो
John
को
बिलकुल
पसंद
न
थी.
इसी
लिए
शायद
वो
गाँव
छोड़
यहाँ
शहर
भाग
आया
था.
आज
John
एक
बड़े
से
अस्पताल
में
एक
ward
boy का
कम
कर
रहा
है.
ये
कमरा
उसको
जिस
अस्पताल
में
वो
काम
करता
है
उन्होंने
ही
दिया
है.
ये
कमरा
और
ये
attached
bathroom, आप
सोच
रहे
होंगे
और
kitchen?
तो
साहिब
kitchen
की
ज़ुरूरत
ही
क्या
है
-
अस्पताल
की
canteen
किस
मर्ज़
की
दवा
है.
आज
4
रोज़
बाद
John
चैन
की
नींद
सो
पाया
है.
4 रोज़
बाद
इसलिए
क्युकी.....
खैर
वो
आप
कहानी
के
अंत
तक
आते-आते
खुद
ही
समझ
जायेंगे.
अभी
सुबह
होने
में
वक़्त
है,
सोने
दो..
सोने
दो
इसे...
(Mime
of sleeping in bed and then alarm
on mobile phone)
John:
ओह!
मारे
गए,
मिसेस
साहनी
मेरा
इंतज़ार
कर
रही
होंगी.
(Switches
on fm radio,
mime and movement for getting
ready for the hospital,
switches
off radio after getting ready).
अच्छा
माँ,
शाम
को
मिलता
हूँ,
प्रणाम...
Mrs.
Sahai
मेरा
इंतज़ार कर रही होंगी...
(Transition
Music to change the set)
(In
hospital) good morning Mrs. Sahaye. कैसी
है
आप?
रात
को
नीद
तो
अच्छी
आई
ना?
ओह,
अच्छा....
हममम...
ऐसे
समय
मे
यह
सब
होता
है
.
आप
पहली
बार
मां
बन
रही
है
ना,
मैं
समझ
सकता
हूँ.
मगर
आप
बिलकल
फिक्र
मत
किजिये.
John
के
होते हुए No
Tension. अभी
आप
आराम
किजिए.
बस
मैं
यू
गया
और
यू
आया
.
मिलते
हैं
थोड़ी
देर
में.
O.K.
सूत्रधार
:
जब
भी
अस्पताल
मे
Mrs.
Sahaye जैसा
कोइ
patient
आता
तो
john
बेहद
खुश
हो
जाता.
घर
मे
आने
वाली
खुशी
की
उमग
शायद
उस
patient
को
या
उसके
घरवालों
को
उतनी
नहीं
होती
थी
जितनी
john
को.
John एक
ही
दिन
मे
Mrs.
Sahaye के
साथ
इतना
घुलमिल
गया
था
जैसे
बरसो
की
जान
-
पेहचान
हो
.
अस्पताल
मे
John
कई
काम
करता
था
मसलन
patient
की
bed-sheet
बदलनी,
बच्चों
के
nappies
बदलने
,
patients
की
और
बच्चों
की
दवाई
का
ध्यान
रखना,
जो
बच्चों
सातवें
या आठवें
महिने
में
पैदा
हो
गए
थे,
जिनहें
incubator
मे
रखा
जाता
है,
उस
incubator
का
ध्यान
रखना,
तापमान
को
नियन्त्रित
करना....
हालांकि
ये
सारे
काम
जो
उसके
नही
थे,
ये
nurse
के
थे
लेकिन
फिर
भी
John
को
ये
सब
करने
मे
मज़ा
आता.
वो
खुशी
-
खुशी
ये
काम
करता
था
और
जब
भी
मौका
मिलता
वो
लपक
कर
पहुंच
जाता
था
Mrs.
Sahaye के
पास.
John
:
Hello
Mrs. Sahaye. कैसी
है
आप?
देखिये
मैं क्या
लाया
हूँ...
stethoscope.. आपको
पता
है
इससे
क्या
होता
है?
मै
बताता
हूँ..
ये
सुनिए.....हममममम
..
आपको
नहीं
सुना
ना,
मै
सुनाता
हूँ
...
ये
लीजिये,
अब
सुनिए...
सुना,
है
ना
नटखट,
शरारती.
अच्छा
अभी
डॉक्टर
साहिब
आ
जाएंगे.
मैं
इसको
वापिस
रख
आता
हूँ.
अभी
मिलता
हूँ
मैं
आपको.
सूत्रधार
:
सारा
दिन
John
की
ये
छोटी-छोटी
शैतानिया
अपने
patients
के
साथ
चलती
रहती
थी
और
patients
को
भी
इसमें
मजा
आता
था तभी
तो
आज
तक
किसी
ने
भी
John
की
कोइ
शिकायत
नहीं
की
थी.
सब
खुश
थे.
डॉक्टर
भी
और
मरीज़
भी
और
अब
तो
John
खुद
जचगी
के
काम
में
इतना
trained
हो
चूका
था
कि
अच्छी
से
अच्छी
दाई
भी
Jhon
का
काम
देख
ले
तो
दांतों
तले
उंगलिया
चबा
ले
.
यकीं
नहीं
?
तो
सुनिए
ये
बगल
वाली
Mr.
Benarji का
जब
time
आया
तो
मालूम
सारे
doctors
bussy. जिसकी
ड्यूटी
वो
फस
गया
trafic
में.
अब
शहर का traffic
तो
आपको पता ही है.....तब
सारा
काम
किसने
समभाला
....
किसने.....
हां
John
ने
और
किसने
....
अपने
काम
के
साथ
बेहद
प्यार
था
Jhon
को...
और
वैसे
भी
अब
करत
करत
अभ्यास
तो,
जड़मति
होत
सुजान
ना ...
(
John
अस्पताल
का
काम
कर
रहा
है
-
in Mime)
अक्सर
अस्पताल
के
काम
में
john
इतना
खो
जाता
था
कि
उसे
खाने
का
भी
ख्याल
नहीं
रहता
था.
और
आज
भी
ऐसा
ही
हुआ.
सुबह
से
दोपहर
और
दोपहर
से
शाम
होने
को
आई
और
खाने
का
कोइ
अता
पता
ही
नहीं
और
तभी
उसे
पता
चली
आज
की
ताज़ा
खबर
कि
आज...
Mrs.
Banerjee अपने
बच्चे
के
साथ
घर
वापिस
जा
रहीं
हैं.
चार
रोज़
पहले
वो
भी
इसी
तरह
अस्पताल
मे
दाखिल
हुई
थी.
जचा
बचा
दोनों
खुश
लेकिन
John....
John
:
अच्छा
Mrs.
Banerji मुने
का
अछे
से
ख्याल
रखियेगा,
सारे
टीके
समय
पर
लगवाने
मत
भूलना,
मामू
की
याद
ज़रूर
कराते
रहना
इसे.
मुन्ना
bye.
.... bye मुन्ना
...
bye...
(Music)
सूत्रधार
:
आहा
.....
John
के
लिए
ये
पल
बेहद
दुखदाई
होते
थे.
वो
समझ
नहीं
पाता
था
कि
वो
क्या
करे??
जब
भी
Mrs.
Banerjee
जैसा
कोइ
patient
अपने
बच्चे
के
साथ
घर
लौटने
को
होता
तो
John
बेहद
उदास
हो
जाता.
ना
जाने
उसे
क्यों
लगता
कि
जैसे
उससे
कोइ
उसकी
अपनी
चीज़
छीने
लिये
जा
रहा
हो.
वो
चाह
कर
भी
उसे
रोक
नहीं
पाता.
वो
जानता
है
कि
वो
कुछ
नहीं
कर
सकता.
उसकी
यही
नियती
है..लेकिन
क्यों
हर
बार
वो
....
वो
ये
अच्छी
तरह
जानता
था
कि
कल
Mrs.
Sahaye भी
इसी
तरह
अपने
बच्चे
के
साथ
अपने
घर
वापिस
चली
जाएँगी
और
वो
कुछ
नहीं
कर
पाएगा.
परसों
कोइ
और
Mrs.
Singh, नर्सो
Mrs.
Chopra और
फिर
कोइ
Mrs.
अमुक
इसी
तरह
....
इसी
तरह
....इसी
ख्याल
के
कारन
अब
उसे
अपने
इस
काम
से
भी
डर
लगने
लगा
था
.
वो
सब
कुछ
छोड़
कर
भाग
जाना
चाहता
था.
आज
इसी
लिए
अस्पताल
से
भी
वो
बिना
किसी
को
कुछ
कहे,
कुछ
भी कहे सुने
चुपचाप
निकल
गया.
वो
कहीं
दूर
चला
जाना
चाहता
था.
बहुत
दूर....
वो
गया
गहरे
नीले
समंदर
के
किनारे.
( music of sea waves)
सागर
किनारे
बैठा
घंटों
सोचता
रहा.
समंदर
बहुत गहरा था ...
लेकिन
आज उसके अंदर के सवाल इतने
गहरे थे कि समंदर भी सुन ले तो
डूब जाये...
(
Mime
)
और
फिर
र्जैसे
कुछ
सोच
लिया
हो.
वो
घर
की
और
वापिस
चल
पड़ा.
( room )
बिस्तर
पर
लेटा-लेटा
वो
फिर
अपने
ख्यालो
में
खो
गया.
फिर
अपनी
छोटी
सी
दुनिया
में
ग़ुम
हो
गया.
बत्ती
को
कभी
जलाता
-
बूझाता,
कभी
फिर
on
करता,
फिर
off
करता....
on-off, on-off, on-off, on-off. फिर
करवट
बदल
कर
सोने
की
कोशिश
करने
लगा.
लेकिन
वो
जानता
था
कि
उसे
नींद
नहीं
आएगी.
उसे
तरह-तरह
की
आवाज़े
सुनाई
दे
रही
थी...
बच्चो
की
किल्कारिया,
पानी
के
बुलबुले,
जैसे
वो
किसी
माँ
की
कोख़
में
बंद
बच्चे
की
पुकार
सुन
रहा
हो.
John
डर
गया.
उसने
एक
दम
से
बत्ती
का
switch
जलाया
लेकिन
light
नहीं
जली...
ये
क्या
...
अचानक
से
ऐसा....
कमरे
मे
ये
तूफ़ान कैसा.
John
ने
torch
on करके
देखा....
गलती
से
उसने
पंखे
का
switch
दबा
दिया
था.
जल्दी
से
उसने
पंखे
को
बंद
किया
और
light
on की.
John
: ये
मुझे
क्या
हो
रहा
है....John....Jooooohn...
उफफ्फ्फ्फ़...
.
(Mime
लडखडाता
हुआ
John
dressing table के
शीशे
के
पास
पहुंचा
फिर
गुसलखाने
में
और
वहा
पहुँच
कर
अपने
ऊपर
पानी
डालने
लगता
है
)
John
: चंदा
है
तू
मेरा
सूरज
है
तू...
चंदा
है
तू
मेरा
सूरज
है
तू...
औ
मेरी आँखों का तारा है
तू.....
(Mime
वो
फिर
आइने
के
पास
आता
है
और
आइने
मे
खुद
को
बड़े
ग़ोर
से
देखता
है
और
फिर.....)
John:
(laughter)
John...John..
तू
...
तू..
साला
John...........
माँ..माँ
देख
तेरा
John
क्या
सोच
रहा
है..
देख
माँ
क्या
सोच
रहा
है
तेरा
John..
माँ..
माँ
John
माँ
बनना
चाहता
है
माँ...
माँ
John
माँ
बनना
चाहता
है
माँ..वो
कभी
नहीं
बन
सकता
माँ.
फिर
भी
वो
बनना
चाहता
है
माँ....
माँ...
(crying)
सूत्रधार
:
John
माँ
नहीं
बन
सकता.
ये
मैं आप और हम सभी जानते हैं
वही
तो
है
mother
impossible.
लेकिन
आप ये नहीं जानते कि John
मैं
और मुझ मैं कोई ज्यादा अंतर
नहीं है ...
वही
हूँ
मै.
जी
हाँ.
मेरी
भी
स्थितियां
परिस्थितिया
ठीक
वैसी
ही
है.
john उस
रात
भी
सो
नहीं
पाया.
मै
भी
नहीं
सो
पाता
हूँ
क्यूंकि
मेरे
भी
अंतर
मे,
गहम
गुफ़ाओ
मे
कहीं
अनेको
नेक
किस्से कहानियाँ कथाएँ
संवाद
कोंधते रहते हैं वो इस मंच पर
आना चाहते हैं जन्म लेना चाहते
हैं लेकिन
मै
...
मैं
जानता
हूँ
कि
मै
कभी
भी
उन्हें
इस मंच
पर
जन्म
नहीं
दे
पाऊंगा...कभी
भी
नहीं.
-
Curtain Close -